नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों को गड्ढामुक्त, समतल और लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ी और व्यापक सड़क सुधार परियोजना को मंजूरी दी है। उन्नत तकनीक के माध्यम से दिल्ली की 241 से अधिक प्रमुख सड़कों का पुनर्विकास किया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस परियोजना में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग है। सभी सड़कों को 'वॉल-टू-वॉल कारपेटिंग' मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, ताकि सड़क निर्माण का काम आधा-अधूरा न रह जाए, बल्कि पूरी चौड़ाई में समान गुणवत्ता सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राजधानी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। योजना के तहत 45 से ज्यादा विधानसभाओं की लगभग 400 किलोमीटर की प्रमुख सड़कें सुधारी जाएंगी।
मुख्यमंत्री का कहना है कि अक्सर सड़कों पर केवल बीच का हिस्सा ठीक किया जाता है या जहां गड्ढे होते हैं वहीं पैचवर्क कर दिया जाता है। इससे कुछ समय बाद सड़क फिर खराब हो जाती है। नई प्रणाली में पूरी सड़क को एक समान रूप से 'वॉल-टू-वॉल' तैयार किया जाएगा, जिससे उसकी मजबूती और आयु दोनों बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि पूरी चौड़ाई में समतल और सीलबंद सतह बनने से धूल और वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। टूटी-फूटी सड़कों से वाहनों की आवाजाही के दौरान मिट्टी और बारीक कण हवा में उड़ते हैं, जो प्रदूषण का बड़ा कारण बनते हैं। अब नए तरीके से सड़कों को बनाने से हवा में उड़ने वाले पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी और आस-पास के क्षेत्रों में स्वच्छता व वायु गुणवत्ता बेहतर होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरी परियोजना को साल के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। काम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि ट्रैफिक पर कम से कम असर पड़े और लोगों को असुविधा न हो। यह कार्य दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा करीब 45 विधानसभाओं में किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत 802.18 करोड़ रुपये है। इसमें से 643.36 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के सेंट्रल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) से प्राप्त होंगे, जबकि 158.82 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य के सहयोग से दिल्ली के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल मरम्मत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान देना है। सड़क की बेस लेयर की जांच, आवश्यकतानुसार सुदृढ़ीकरण, जल निकासी की व्यवस्था और अंतिम कारपेटिंग जैसे सभी चरणों को तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा किया जाएगा। इससे बरसात में जलभराव की समस्या कम होगी और सड़कें लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगी। हम ऐसी सड़कें बनाना चाहते हैं, जो वर्षों तक टिकें और लोगों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा दें। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल भी दिल्ली सरकार ने इसी तकनीक से करीब 150 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया था।
योजना के अनुसार, जिन सड़कों को ठीक किया जाएगा उनमें मालवीय नगर की अगस्त क्रांति मार्ग, आउटर रिंग रोड, राव तुला राम मार्ग, कापससहेड़ा बिजवासन रोड, नजफगढ़-झाड़ौदा रोड, कालकाजी में कैप्टन गौड़ मार्ग, ग्रेटर कैलाश में लाला लाजपत राय मार्ग, रोहिणी में डॉ. के एन काटजू मार्ग, चांदनी चौक में शामनाथ मार्ग, करोल बाग में डीबी गुप्ता रोड, शाहदरा में ईएसआई अस्पताल रोड, सीमापुरी में तांगा स्टैंड रोड, प्रीत विहार रोड, पटपड़गंज रोड, खिचड़ीपुर रोड, खुदीराम बोस रोड, खजूरी फ्लाईओवर, गोकलपुरी फ्लाईओवर, जीरो पुस्ता रोड, सीलमपुर रोड, लोनी रोड समेत अलग-अलग विधानसभाओं की लगभग 400 किलोमीटर लंबी कुल 241 से ज्यादा प्रमुख सड़कें शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत सड़कें किसी भी शहर की विकास यात्रा की रीढ़ होती हैं। बेहतर सड़कें होंगी तो यातायात सुगम होगा, दुर्घटनाएं कम होंगी और लोगों का समय बचेगा। हमारी सरकार दिल्ली को आधुनिक और व्यवस्थित राजधानी बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। सरकार का मानना है कि इस व्यापक सड़क पुनर्विकास अभियान से न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि दिल्ली की समग्र छवि और शहरी ढांचा भी सुदृढ़ होगा।
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